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कर्मचारी राज्य बीमा योजना
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (केन्द्रीय) नियम 1950

       कर्मचारी राज्य बीमा योजना एक अनोखी बहुआयामी स्ववित्तपोषित सामाजिक सुरक्षा योजना है | इसमें हर अंशदाता हितकारी भी और हितलाभार्थी भी होता है | यह एक एकीकृत स्वास्थ्य बीमा योजना है जो बीमारी,प्रसूति अपंगता और रोजगार चोट से हुई मृत्यु जैसी अकस्मिक्ताओं में बीमाकृत व्यक्ति और उसके आश्रितजनों को पूर्ण चिकित्सा के साथ-साथ नकद हितलाभ भी प्रदान करती है |

      कर्मचारी,नियोक्ता,राज्य सरकार और निगम लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के संगठित और समन्वित प्रयास में प्रमुख दावेदार है | नियोक्ता की भूमिका योजना की सफलता में विशेषरूप से महत्वपूर्ण है | चाहे व्याप्ति हेतु सर्वेक्षण का मामला हो, चाहे कार्यान्वयन, कारखानों, स्थापनाओं का पंजीकरण, कर्मचारी का पंजीकरण,अंशदान का नियमित भुगतान, निरीक्षण में मदद और कर्मचारियों को निरंतर हितलाभ मुहैय्या करने हेतु सामायिक कार्रवाई का मामला हो, नियोक्ता की महत्वपूर्ण भूमिका का नाकारा नहीं जा सकता |

व्याप्ति

कारखाने / स्थापना की व्याप्ति

 

अधिनियम, प्रथम दृष्टया, उन सभी गैर-मौसमी कारखानों के लिए लागू है जो विद्युत का उपयोग करते हैं और जहाँ 10 या उससे अधिक व्यक्ति मजदूरी के लिए काम करते हैं . यह अधिनियम उन विनिर्माण ईकाईयों और स्थापनाओं के लिए भी लागू है जो विद्युत का उपयोग नहीं करती हैं परन्तु उनके यहाँ 20 या उससे अधिक व्यक्ति मजदूरी के लिए काम करते हैं . ये कारखाने/स्थापनाएं/ईकाईयां कार्यान्वित भौगोलिक क्षेत्र में स्थित होनी चाहिए . वर्तमान में कारखानों/स्थापनाओं के ऐसे कर्मचारी व्याप्त हैं जिनकी प्रतिमाह मजदूरी रु.15000/- से अधिक नहीं है .

अधिनियम की धारा 1(5) के तहत इसके प्रावधान निम्नलिखित प्रकार की स्थापनाओं के लिए भी लागू होंगे

दुकानें

होटल और रेस्त्राँ, क्लब

पूर्वदर्शन थिएटर सहित सिनेमा

समाचार पत्र स्थापनाएं

सड़क मोटर परिवहन स्थापनाएं

 

क.रा.बी.अधिनियम की धारा 1(5) के तहत समुचित सरकार को योजना को अन्य स्थापनाओं अथवा स्थापना के प्रकारों, उद्योगों, वाणिज्यिक, कृषि सम्बन्धी अथवा अन्य स्थापनाओं के लिए लागू करने की शक्ति प्रदान की गई है . अत: राज्य सरकार अधिनियम के प्रावधानों का दायरा बढ़ा सकती है . इसके लिए क.रा.बी.निगम से परामर्श और केन्द्र सरकार का अनुमोदन लेना होगा . साथ ही साथ सरकारी राजपत्र में उक्त आशय की सूचना 6 महीने पहले प्रकाशित करनी होगी . यदि राज्य के किसी हिस्से में इस अधिनियम के प्रावधान पहले से लागू हों, तो उक्त प्रावधान राज्य के उन हिस्सों में स्थित उक्त प्रकार के स्थापनाओं या स्थापना के प्रकारों को लागू होंगे . इसके लिए शर्त यह होगी कि राज्य के किसी अन्य हिस्से में समान स्थापनाओं या स्थापना के प्रकारों को उक्त प्रावधान पहले से ही लागू हों .

 

परस्पर सन्दर्भ
1.
व्याप्ति के लिए मजदूरी की अधिकतम सीमा
2.
कारखाने/स्थापना की व्याप्ति कैसे निर्धारित करें - दिशा निर्देश
3.
निर्माण एजेंसियों/बिल्डरों के कार्यालयों की दुकान के रूप में व्याप्ति
4.
अधिनियम के अंतर्गत व्याप्ति के लिए 'कर्मचारी' शब्द का विवेचन
5.
अंशदान अवधि के दौरान व्याप्ति जारी रहना
6.
.रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9) के अंतर्गत व्याप्ति के उद्देश्य हेतु मजदूरी क़ी गणना
7.
.रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9)() के अंतर्गत मजदूरी की अधिकतम सीमा निश्चित करने के लिए समयोपरि भुगतान/पारिश्रमिक को शामिल न करना

व्याप्ति संबंधी दिशा निर्देश


किसी कारखाने या स्थापना की व्याप्ति निर्धारित करते समय प्रधान नियोक्ता द्वारा सीधे नियुक्त व्यक्तियों के अतिरिक्त निम्नलिखित प्रकार के कर्मचारी भी गणना में लिए जाएंगे:-

- कारखाने की पंजी में अंकित सभी कर्मचारी, चाहे वे मजदूरी सहित अथवा मजदूरी रहित छुट्टी पर हों
-
मजदूरी के लिए नियुक्त वैकल्पिक/बदली कर्मचारी
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मजदूरी के लिए नियुक्त आकस्मिक या अंशकालिक कर्मचारी
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निदेशक,िनका कंपनी के वेतन पंजी पर नाम अंकित है और जिनका वेतन रु.10000/-प्रति माह है

- ऐसे कर्मचारी जो कार्यान्वित क्षेत्र में स्थित शाखा कार्यालय, बिक्री कार्यालय आदि में काम करतें हैं और जिनकी मासिक मजदूरी रु.15000 हैं,व्याप्त किए जाएंगे
-
ऐसे कर्मचारी जो ठेकेदार द्वारा अथवा ठेकेदार के माध्यम से (लेकिन स्वयं ठेकेदार नहीं) नियुक्त किये गए हैं और नियोक्ता अथवा उसके प्रतिनिधि के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में  कारखाने/स्थापना परिसर के अन्दर अथवा बाहर कार्य कर रहे हैं
-
कारखाना भवन एवं मशीनों के निर्माण,मरम्मत,अनुरक्षण व विस्तार तथा कच्चे माल अथवा तैयार उत्पाद के चढाने उतारने और परिवहन के प्रयोजनार्थ नियुक्त किए गए कर्मचारी
-
ऐसे प्रशिक्षु जो प्रशिक्षु अधिनियम 1961 अथवा स्थापना के स्थाई आदेशों के तहत नियुक्त नहीं किए गए हों

अधिक जानकारी

- निर्माण एजेंसियों/बिल्डरों के कार्यालयों की दुकान के रूप में व्याप्ति
-
अंशदान अवधि के दौरान व्याप्ति जारी रहना

- .रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9) के अंतर्गत व्याप्ति के उद्देश्य हेतु मजदूरी क़ी गणना

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

व्याप्ति

निर्माण एजेंसियों/बिल्डरों के कार्यालयों की दुकान के रूप में व्याप्ति

 

गैर-कार्यान्वित क्षेत्र में अवस्थित निर्माण स्थलों के मजदूरों की व्याप्ति विचारणीय नहीं है केवल कार्यान्वित क्षेत्र में अवस्थित कार्यालय, से जुड़े हुए 20 या 20 से अधिक नियमित एवं अन्य कर्मचारी व्याप्ति के लिए विचारणीय हैं | इस प्रकार, एक स्थापना का प्रधान कार्यालय या पंजीकृत कार्यालय अपने स्वयं के कर्मचारियों की संख्या के आधार पर या अपनी शाखाओं में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या को जोड़कर क.रा.बी.अधिनियम के अंतर्गत व्याप्त है| उसकी शाखाएँ चाहे कहीं भी स्थित हों, व्याप्त मानी जाएंगी | वहां कार्यरत कर्मचारियों का पंजीकरण कराकर अधिनियम का अनुपालन किया जाएगा| यदि योजना उस क्षेत्र में कार्यान्वित नहीं की गयी है जहाँ शाखा विशेष अवस्थित है, तो उसके कर्मचारी अधिनियम की धारा 88 के तहत छूट के पात्र होंगेंइसी प्रकार, चिकित्सा एवं बिक्री प्रतिनिधि तथा दौरे पर रहने वाले अन्य कर्मचारी जो एक वर्ष में 7 से अधिक महीनों के लिए दौरे पर रहते हों, वे भी इस धारा के तहत छूट के लिए पात्र हैं |

 

अधिक जानकारी

  कारखाने/स्थापना की व्याप्ति कैसे निर्धारित करें - दिशा निर्देश

  अधिनियम के अंतर्गत व्याप्ति के लिए 'कर्मचारी' शब्द का विवेचन

  अंशदान अवधि के दौरान व्याप्ति जारी रहना

  .रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9) के अंतर्गत व्याप्ति के उद्देश्य हेतु मजदूरी क़ी गणना

  .रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9)() के अंतर्गत मजदूरी की अधिकतम सीमा निश्चित करने के लिए समयोपरि भुगतान/पारिश्रमिक को शामिल न करना

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कर्मचारी की व्याप्ति

अंशदान अवधि के दौरान व्याप्ति जारी रहना

 

यदि कोई कर्मचारी अप्रैल या अक्टूबर माह के शुरू में रु.7500 /- प्रति माह ( समयोपरि पारिश्रमिक को छोड़कर) से अधिक मजदूरी प्राप्त नहीं कर रहा है एवं  अंशदान अवधि अर्थात सितम्बर एवं मार्च के अंत तक कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहता है और यदि उसकी कुल मजदूरी रु.7500 /- प्रति माह से अधिक हो जाती है तथापि, अंशदान अवधि के अंत तक उसकी कुल मजदूरी पर अंशदान देय है | इसी प्रकार, यदि कोई कर्मचारी अंशदान अवधि क़ी शुरुआत के पश्चात बाद के महीनों में व्याप्तियोग्य हो जाता है, तो वह अंशदान हेतु निर्धारित मजदूरी की अधिकतम सीमा से बाहर होने के बावजूद अंशदान अवधि के अंत तक व्याप्त रहेगा.

 

 

अधिक जानकारी

  कारखाने/स्थापना की व्याप्ति कैसे निर्धारित करें - दिशा निर्देश

  निर्माण एजेंसियों/बिल्डरों के कार्यालयों की दुकान के रूप में व्याप्ति

  अधिनियम के अंतर्गत व्याप्ति के लिए 'कर्मचारी' शब्द का विवेचन

  .रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9) के अंतर्गत व्याप्ति के उद्देश्य हेतु मजदूरी क़ी गणना

  .रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9)() के अंतर्गत मजदूरी की अधिकतम सीमा निश्चित करने के लिए समयोपरि भुगतान/पारिश्रमिक को शामिल न करना

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कर्मचारी की व्याप्ति

.रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9) के अंतर्गत व्याप्ति के उद्देश्य हेतु मजदूरी क़ी गणना

 

  किसी माह के लिए नियोक्ता द्वारा नियत मजदूरी की राशि (समयोपरि पारिश्रमिक को छोड़कर) को प्रति माह कार्यरत कर्मचारियों की व्याप्ति निर्धारित करने के लिए बतौर "मजदूरी" स्वीकार किया जा सकता है; परन्तु अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों की व्याप्ति का निर्धारण उनके द्वारा अर्जित कल्पित मजदूरी (Notional Wages) के आधार पर किया जायेगा |

मजदूरी क्या है ?
मजदूरी में क्या शामिल नहीं है ?

 

 

अधिक जानकारी

  कारखाने/स्थापना की व्याप्ति कैसे निर्धारित करें - दिशा निर्देश

  निर्माण एजेंसियों/बिल्डरों के कार्यालयों की दुकान के रूप में व्याप्ति

  अधिनियम के अंतर्गत व्याप्ति के लिए 'कर्मचारी' शब्द का विवेचन

  अंशदान अवधि के दौरान व्याप्ति जारी रहना

  .रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9)() के अंतर्गत मजदूरी की अधिकतम सीमा निश्चित करने के लिए समयोपरि भुगतान/पारिश्रमिक को शामिल न करना

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

व्याप्ति

.रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9)() के अंतर्गत मजदूरी की अधिकतम सीमा निश्चित करने के लिए समयोपरि भुगतान/पारिश्रमिक को शामिल न करना

 

समयोपरि पारिश्रमिक एक नियमित और निरंतर भुगतान नहीं है, लेकिन यह एक सामयिक प्रकृति का है| यदि समयोपरि पारिश्रमिक शामिल करने पर कोई कर्मचारी कुछ समय के लिए व्याप्ति सीमा के बाहर जाता है और समयोपरि वेतन नहीं मिलने पर, पुन: इस योजना के दायरे में वापस आ जाता है, तो अवधि के एक भाग के लिए अंशदान का भुगतान करने के बावजूद, योजना में हो रहा लगातार व्यवधान उसे योजना के तहत स्वीकार्य हितलाभों से वंचित करता है | कर्मचारी की अनवरत सुरक्षा एवं संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए व्याप्ति निश्चित करते समय समयोपरि वेतन को शामिल नहीं किया गया है | तथापि, जिस समय कर्मचारी समयोपरि कार्य कर रहा था, उस अवधि के दौरान जोखिम को व्याप्त करने के लिए समयोपरि पारिश्रमिक को अंशदान भुगतान हेतु शामिल किया गया है, ताकि उक्त कर्मचारी वर्धित दर पर नगद हितलाभ प्राप्त कर सके| उसकी औसत दैनिक मजदूरी में समयोपरि पारिश्रमिक जोड़ने से वह मानक हितलाभ सारणी की उच्चतर दर पर नगद हितलाभ का दावा करने के योग्य हो जाता है |

 

 

अधिक जानकारी

  कारखाने/स्थापना की व्याप्ति कैसे निर्धारित करें - दिशा निर्देश

  निर्माण एजेंसियों/बिल्डरों के कार्यालयों की दुकान के रूप में व्याप्ति

  अधिनियम के अंतर्गत व्याप्ति के लिए 'कर्मचारी' शब्द का विवेचन

  अंशदान अवधि के दौरान व्याप्ति जारी रहना

  .रा.बी.अधिनियम क़ी धारा 2(9) के अंतर्गत व्याप्ति के उद्देश्य हेतु मजदूरी क़ी गणना

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रशासन

 

राष्ट्रीय स्तर पर कर्मचारी राज्य बीमा योजना का प्रबंधन कर्मचारी राज्य बीमा नामक सांविधिक निकाय द्वारा किया जाता है जिसका गठन कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 के तहत किया गया है | इसमें नियोक्ताओं, कर्मचारियों, केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों, चिकित्सा व्यवसाय और संसद के प्रतिनिधि शामिल होते हैं |

निगम के सदस्यों में से स्थाई समिति का गठन किया जाता है जो योजना के प्रबंधन के लिए कार्यकारी निकाय के तौर पर काम करती है |

चिकित्सा हितलाभ परिषद, जो एक सांविधिक निकाय है, योजना के लाभार्थियों की चिकित्सकीय देखभाल से सम्बंधित मामलों पर निगम को सलाह देती है |

राज्य स्तर पर प्रत्येक राज्य में क्षेत्रीय बोर्डों का गठन किया गया है और ज़मीनी स्तर पर स्थानीय समितियों का गठन किया गया है जो योजना के सुचारू कार्यान्वयन में परामर्शदायी निकाय के रूप में काम करती हैं |

 

अधिक जानकारी

  क्षेत्रीय बोर्ड, महाराष्ट्र का गठन

  स्थानीय समितियों के कार्य

 

 

क.रा.बी.अधिनियम की धारा 1(5) के तहत समुचित सरकार को योजना को अन्य स्थापनाओं अथवा स्थापना के प्रकारों / उद्योगों, वाणिज्यिक, कृषि सम्बन्धी अथवा अन्य स्थापनाओं के लिए लागू करने की शक्ति प्रदान की गई है | अत: राज्य सरकार अधिनियम के प्रावधानों का दायरा बढ़ा सकती है | इसके लिए क.रा.बी. निगम से परामर्श और केन्द्र सरकार का अनुमोदन लेना होगा | साथ ही साथ सरकारी राजपत्र में उक्त आशय की सूचना 6 महीने पहले प्रकाशित करनी होगी | शर्त यह होगी कि यदि राज्य के किसी हिस्से में इस अधिनियम के प्रावधान पहले से लागू हों, तो उक्त प्रावधान राज्य के उन हिस्सों में स्थित उस प्रकार के स्थापनाओं या स्थापनाओं के प्रकारों को लागू होंगे | शर्त यह भी होगी कि राज्य के किसी अन्य हिस्से में समान स्थापनाओं या स्थापनाओं के प्रकारों को उक्त प्रावधान पहले से ही लागू हों |

क्या आप जानते हैं ?

एक बार यदि कोई कारखाना / स्थापना, क.रा.बी.अधिनियम के तहत व्याप्त हो जाती है तो, यह सदा व्याप्त रहती है, भले ही बाद में कर्मचारियों की नीयत संख्या 10/20 से घट जाए अथवा विद्युत की सहायता से विनिर्माण प्रक्रिया बंद हो जाये |

 

 

 

 

 

 

 

आधारभूत संरचना

 

रोज़मर्रा के प्रशासन के लिए निगम का केन्द्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है . इसके अतिरिक्त देश भर में औद्योगिक केन्द्रों पर क्षेत्रीय कार्यालय और उप क्षेत्रीय कार्यालय तथा 800 से अधिक शाखा कार्यालय हैं . योजना के तहत चिकित्सा सुविधा राज्य सरकारों द्वारा मुहैया कराई जाती है . यह उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है परन्तु दिल्ली राज्य और उ.प्र. के नोएडा क्षेत्र अपवाद हैं . यहाँ चिकित्सा सुविधाएं सीधे निगम द्वारा मुहैया कराई जाती हैं .

क.रा.बी.लाभार्थियों को व्यवसायजन्य रोगों के शीघ्र निदान की सुविधा मुहैया कराने की दृष्टि से, क.रा.बी.निगम ने कोलकाता, दिल्ली, मुंबई,चेन्नई और नागदा में पूर्ण सुसज्जित जोनल व्यवसायजन्य रोग केन्द्र स्थापित किये हैं . ये केन्द्र पड़ोसी राज्यों के क.रा.बी.लाभार्थियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करते हैं .

 

 

अधिक जानकारी

  चिकित्सा का बुनियादी ढांचा

  उ.क्षे.का.पुणे के बारे में जानें

  पुणे उप क्षेत्र में निगम औषधालय

 

 

परिभाषाएं

नियोजक कर्मचारी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आधारभूत संरचना (चिकित्सा)

 

कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अधीन चिकित्सा सुविधा, सेवा प्रणाली (प्रत्यक्ष विधि) व पैनल प्रणाली अर्थात अप्रत्यक्ष विधि, दोनों ही तरीकों से दी जाती है | सेवा प्रणाली के तहत निगम ने कार्यान्वित क्षेत्रों में तकरीबन 1500 क.रा.बी. औषधालय स्थापित किये हैं | पैनल प्रणाली में चिकित्सा व्यवसायियों के तकरीबन 3000 निजी क्लीनिक हितलाभाधिकारियों को उपचार उपलब्ध करवाते हैं | विशेषज्ञ सेवाएं चिकित्सालयों के बाह्य रोगी विभागों अथवा अलग निदान केन्द्रों में उपलब्ध हैं | अतिविशिष्ट उपचार हेतु विशेषज्ञों की सेवाओं की आवश्यकता वाले मामलों को बाहर के संस्थानों में संदर्भित किया जाता है |

भर्ती होने की सुविधाएँ क.रा.बी.चिकित्सालयों अथवा सरकारी या सार्वजनिक चिकित्सालयों से संबद्ध क.रा.बी. वार्डों (उपभवनों) में उपलब्ध करवाई जाती हैं | (जिन क्षेत्रों में कोई क.रा.बी.चिकित्सालय अथवा वार्ड (ई.एस.आई.वार्ड) नहीं हैं अथवा जहाँ इस तरह की अलग सुविधाएं उपलब्ध करवाना साध्य नहीं है, वहां विद्यमान सरकारी, सार्वजनिक व निजी चिकित्सालयों में भुगतान आधार पर बिस्तर आरक्षित कर भर्ती होने की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है) | बीमाकृत व्यक्ति के प्रति हजार पारिवारिक ईकाईयों पर 4 बिस्तर के अनुपात में चिकित्सालयों में बिस्तर उपलब्ध करवाए जाते हैं |

सभी औषधियां, ड्रेसिंग व उपचार सामग्री एवं उपकरण नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं | सेवा प्रणाली के तहत ये औषधियां क.रा.बी.औषधालयों, क.रा.बी.चिकित्सालयों व दवा भंडारों के माध्यम से वितरित की जाती हैं | पैनल प्रणाली में सामान्य औषधियां आई.एम्.पी.क्लीनिकों से व महंगी औषधियां विशेषज्ञ के नुस्खे पर, अनुमोदित दवाई विक्रेताओं व योजना के तहत स्थापित मेडिकल स्टोरों के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती हैं | कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने स्वयं का एक विस्तृत औषध-कोष बनाया है जिसमें सामान्य उपयोग में लाई जाने वाली 800 से अधिक औषधियों की सूची है |

अति-विशिष्टता उपचार :

अति-विशिष्ट उपचार जैसे ओपन हार्ट सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट अथवा विशिष्ट जांच जैसे कैट स्कैन, एम.आर.आई., एंजियोग्राफी आदि के लिए देश के विख्यात, प्रमुख चिकित्सालयों के साथ सन्दर्भ की व्यवस्था की गई है | इन उपचारों, जांच सुविधाओं अथवा शल्य-क्रियाओं का पूर्ण व्यय क.रा.बी.योजना द्वारा वहन किया जाता है |

यद्यपि हितलाभाधिकारियों को चिकित्सा सुविधा कुल मिलाकर चिकित्सा की आधुनिक पद्धति (एलोपैथी) द्वारा ही उपलब्ध करवाई जाती है, कई क्षेत्रों में बीमाकृत व्यक्तियों की मांग पर देशी चिकित्सा पद्धतियों जैसे (i) आयुर्वेद (ii) यूनानी (iii) होम्योपैथी व सिद्ध की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाती हैं |

अधिक जानकारी

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वित्त व्यवस्था

योजना मुख्यत: कार्यान्वित क्षेत्र के बीमाकृत व्यक्तियों और उनके नियोक्ताओं से लिए गए अंशदान द्वारा वित्त-पोषित होती है | यह अंशदान कर्मचारियों को देय मजदूरी का एक अल्प परन्तु निर्धारित प्रतिशत होता है |

जो कर्मचारी रु.100/- या इससे कम औसत दैनिक मजदूरी पाते हैं, वे अंशदान भुगतान से मुक्त हैं परन्तु वे योजना के तहत सभी सामाजिक सुरक्षा हितलाभों के हकदार हैं |

अंशदान की दर

       कर्मचारी का अंशदान - मजदूरी का 1.75%

       नियोक्ता का अंशदान - मजदूरी का 4.75%

राज्य सरकारें अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अपने-अपने राज्यों में क.रा.बी.लाभार्थियों की चिकित्सा देखभाल पर हुए खर्च जो, प्रति व्यक्ति व्यय सीमा के अंदर हो, में 12.5% का योगदान देती हैं |

इस व्यय सीमा से अधिक खर्च पूरी तरह से राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाता है |

कर्मचारियों और नियोक्ताओं द्वारा अदा किया गया अंशदान एक साझा निधि (common pool) जिसे क.रा.बी.निधि कहते हैं, में जमा किया जाता है | इसका इस्तेमाल बीमाकृत व्यक्तियों और उनके आश्रितजनों को नकद हितलाभ का भुगतान करने के साथ-साथ लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए भी किया जाता है | निगम के प्रशासनिक और अन्य खर्चों का वहन इसी निधि से किया जाता है |

 

अधिक जानकारी

  योजना के तहत हितलाभ

  नियोक्ताओं हेतु सूचना

  कर्मचारियों हेतु सूचना

 

 

क्या आप जानते हैं ?

पिछले पाँच दशकों में क.रा.बी.योजना, देश के सबसे बड़े बहुआयामी सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के रूप में उभरी है |

 

 

 

 

 

 

 

 

अपवाद

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के प्रावधान राज्य सरकारों / केन्द्र सरकार के कारखानों / स्थापनाओं के उन कर्मचारियों को नहीं लागू होते जिन्हें कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत प्रदत्त सामान्य या बेहतर हितलाभ प्राप्त हैं . प्रत्येक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का मामला सम्बंधित प्रबंधक द्वारा उनके कर्मचारियों को प्राप्त हितलाभों की मात्रा और गुणवत्ता की कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत स्वीकार्य हितलाभों से तुलना करने के बाद गुण-दोष के आधार पर तय किया जाता है .

समुचित सरकार कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम की धारा 87 के तहत किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में स्थित कारखानों/स्थापनाओं अथवा खास श्रेणी के कारखानों और स्थापनाओं के सम्बन्ध में अधिनियम के कार्यान्वयन से छूट दे सकती है या छूट का नवीकरण कर सकती है जो एक बार में एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए नहीं हो सकते .

अधिनियम की धारा 88 के तहत समुचित सरकार द्वारा कर्मचारियों अथवा कर्मचारियों के उस वर्ग को छूट दी जाती है जो एक वर्ष में 7 महीने से अधिक के लिए मुख्यालय से बाहर रहते हैं . इसी प्रकार जो कर्मचारी गैर-कार्यान्वित क्षेत्र में तैनात हैं, उन्हें भी छूट दी जाती है .

धारा 87 अथवा 88 के तहत छूट तब तक स्वीकार नहीं की जा सकती जब तक निगम को अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के लिए तर्कसंगत समय न दिया गया हो और वह समुचित सरकार द्वारा स्वीकार न किया गया हो .

धारा 90 के तहत स्थानीय प्रशासन जैसे नगर पालिका, नगर निगम इत्यादि के किसी कारखाने / स्थापना को छूट दी जा सकती है यदि इन कार्यालयों / स्थापनाओं के कर्मचारी अधिनियम के तहत प्रदत्त हितलाभों के सामान या उससे बेहतर हितलाभ प्राप्त कर रहे हों .

अधिक जानकारी

  अधिनियम की धारा 87 से 90 और 91 ए के अधीन छूट देने हेतु निगम की नीति

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अंशदान

 

अंशदान निगम को देय वह राशि है जो एक कर्मचारी के सम्बन्ध में प्रधान नियोक्ता द्वारा दी जाती है . इसमें कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों द्वारा देय राशि शामिल है .

नियोक्ता का यह दायित्व है कि वह नियोक्ता का अंश 4.75% की दर से और कर्मचारी का अंश 1.75% की दर से गणना कर उसे क.रा.बी.निगम के खाते में जमा करे . यह अंशदान आगामी माह की 21 ता. को या उससे पहले देय होता है . यदि कर्मचारी की दैनिक औसत मजदूरी रु.100/- तक है तो उसे अपने हिस्से के अंशदान के भुगतान से छूट है . लेकिन नियोक्ता को अपने हिस्से का अंशदान कर्मचारी को प्राप्त या प्राप्त होने वाले वेतन के 4.75% की दर से करना होता है .

 

अंशदान की वसूली

 

प्रथम दृष्टया प्रधान नियोक्ता प्रत्येक कर्मचारी, चाहे वह सीधे या आसन्न नियोक्ता के माध्यम से नियुक्त हो, के सम्बन्ध में अपने हिस्से के अंशदान का भुगतान करेगा . तत्पश्चात, कर्मचारियों का हिस्सा उनके वेतन से कटौती करके वसूला जायेगा . यह कटौती सम्बंधित अंशदान अवधि के वेतन से ही की जा सकती है . इस तरह की कोई कटौती देय अंशदान अवधि से भिन्न अवधि के वेतन से नहीं की जा सकती .

 

अधिक जानकारी

 

  बकाया मजदूरी पर अंशदान

  अंशदान अवधि और हितलाभ अवधि

  अंशदान भुगतान की विधि एवं समय सीमा

  देय अंशदान की गणना विधि एवं भुगतान

  अंशदान विवरणी प्रस्तुत करने हेतु मार्गदर्शक सिद्धांत

  अंशदान का भुगतान न करने की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई

 

हितलाभों के बारे में जानें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अंशदान और हितलाभ अवधियाँ

 

वर्ष में 6 महीने की दो अंशदान अवधियाँ होती हैं | उसी से सम्बंधित 6 महीने की एक हितलाभ अवधि होती है | विवरण निम्न प्रकार है :-

 

अंशदान अवधि तदनुरूप हितलाभ अवधि

1 अप्रैल से 30 सितम्बर तक आगामी वर्ष की 1 जनवरी से 30 जून तक

आगामी वर्ष के 1 अक्तूबर से 31 मार्च कैलेंडर वर्ष की 1 जुलाई से 31 दिसंबर की अवधि

 

यदि कोई व्यक्ति अधिनियम में यथा परिभाषित पहली बार कर्मचारी बनता है तो पहली अंशदान अवधि उस दिन से शुरू होगी जिस दिन वह बीमायोग्य रोज़गार में प्रवेश करता है | तदनुरूप उसकी हितलाभ अवधि 9 महीने की अवधि की समाप्ति के पश्चात शुरू होगी |

 

अधिक जानकारी

       बकाया मजदूरी के संबंध में

       अंशदान अवधि और हितलाभ अवधि

       अंशदान भुगतान की विधि एवं समय-सीमा

       देय अंशदान की गणना विधि और इसका भुगतान

       अंशदान विवरणी प्रस्तुति हेतु दिशा-निर्देश

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अंशदान

गणना एवं भुगतान

 

1.     प्रत्येक व्याप्त कर्मचारी के संबंध में मजदूरी / वेतन काम के दिन और कटौती किये गए अंशदान की प्रविष्टि हर महीने फॉर्म 7 के प्रारूप में उपलब्ध रजिस्टर में की जानी है |

2.     प्रविष्टि कर योग करने के बाद भुगतान की जाने वाली अंशदान राशि की गणना की जानी है | एक व्यक्ति की अंशदान राशि 5 पैसे के गुणक में अगले उच्च अंक में पूर्णांकित की जानी है और एक चालान के तहत देय अंशदान की सकल राशि यदि 50 पैसे से अधिक है तो रूपए में पूर्णांकित की जानी चाहिए |

3.     क.रा.बी.चालान 4 प्रतियों में भरा जाएगा | नियोक्ता कूट संख्या सभी चालानों पर प्रमुखता से (रबड़ की मोहर का प्रयोग भी किया जा सकता है) अंकित की जानी चाहिए |

4.     चालान की चारों प्रतियाँ नकद/चेक के साथ भारतीय स्टेट बैंक की संबंधित शाखा में प्रस्तुत करें | बैंक चालान की दो प्रतियाँ नियोक्ता को वापस कर देगा | 1 प्रति नियोक्ता की क.रा.बी.फ़ाइल में रखी जानी चाहिए | दूसरी प्रति छमाही अंशदान विवरणी (फॉर्म 6) के साथ संलग्न की जानी चाहिए | जिन नियोक्ताओं की शाखाएं / इकाईयां एक से अधिक राज्यों में स्थित हैं, वे अपनी इच्छा से अपने मूल क्षेत्र में/ उप क्षेत्र में, जहाँ उनका कारखाना / स्थापना स्थित है, अथवा उन क्षेत्रों में जहाँ पर उनके शाखा कार्यालय / बिक्री कार्यालय स्थित हैं, उनके माध्यम से अंशदान का भुगतान कर सकते हैं |

5.     प्रत्येक अंशदान अवधि की समाप्ति के बाद 6 महीनों के स्तंभों (कालमों) का योग कर चार प्रतियों में अंशदान विवरणी तैयार करें और इनके साथ 6 चालानों की संबंधित प्रति संलग्न करें | अंशदान विवरणी के मुखपृष्ठ पर जहाँ भुगतान विवरण का कालम होता है, वहाँ आवश्यक प्रविष्टि करें | यह अंश नियोक्ता के प्राधिकृत हस्ताक्षरी द्वारा प्रमाणित किया जाना है |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अंशदान

अंशदान विवरणी (आर.सी.) की प्रस्तुति

 

अंशदान विवरणी 4 प्रतियों में तैयार कर समुचित शाखा कार्यालय में अंशदान अवधि की समाप्ति के 42 दिन के अंदर (12 मई अथवा 11 नवंबर) प्रस्तुत की जानी चाहिए |

मुख्य कूट संख्या और प्रत्येक उप कूट संख्या के लिए अंशदान विवरणी अलग-अलग प्रस्तुत की जायेगी | यह नियोक्ता के हित में होगा कि वह मुख्य इकाई के अनुपालन के साथ-साथ उप इकाई, शाखा कार्यालय, विक्री कार्यालय, पंजीकृत कार्यालय इत्यादि के संबंध में भी अनुपालन सुनिश्चित करें |

यदि नियोक्ता मूल इकाई से ही अनुपालन का विकल्प चुनता है तो वह सभी शाखाओं के संबंध में केवल एक विवरणी प्रस्तुत कर सकता है | ऐसी स्थिति में एकल विवरणी उस शाखा कार्यालय में स्वीकार की जायेगी जिससे वह मूल इकाई संबद्ध है | ऐसे नियोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित शाखा कार्यालयों का नाम स्पष्ट रूप से विवरणी में अंकित करें ताकि इन्हें उन शाखा कार्यालयों को भेजने में सहूलियत हो और उनके बीमाकृत व्यक्तियों को होने वाली अनावश्यक असुविधा से बचा जा सके |

उपर्युक्त नियोक्ता प्रत्येक शाखा कार्यालय, विक्री कार्यालय के संबंध में पृथक-पृथक अंशदान विवरणी प्रस्तुत कर सकते हैं | परन्तु प्रत्येक शाखा कार्यालय के कर्मचारियों के अंशदान भुगतान के प्रमाणस्वरूप चालानों की प्रतियाँ सभी विवरणियों के साथ संलग्न की जानी चाहिए |

यदि नियोक्ता क्षेत्र विशेष में स्थित अपने शाखा कार्यालय, विक्री कार्यालय के माध्यम से अनुपालन करना चाहता है, तो उसके शाखा कार्यालय द्वारा अंशदान विवरणी निगम के संबंधित शाखा कार्यालय में प्रस्तुत की जा सकती है | इस तरह अनुवर्ती हितलाभ प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं होगी |

अंशदान विवरणी की पावती देते समय शाखा कार्यालय इसकी एक प्रति नियोक्ता को लौटा देगा | नियोक्ता इसे अपनी क.रा.बी.फ़ाइल में रखें और सांविधिक निरीक्षण के लिए निरीक्षण अधिकारी / सामाजिक सुरक्षा अधिकारी के आने पर उन्हें दिखाएँ |